Copyright, Visa and Patent in Hindi

आप लोग पैटंट, कॉपीराइट ओर ट्रेडमार्क जैसे शब्द सुनते ही रहते होंगे. बहुत सारे लोगों के मन में कंफ्यूजन होता है कि आखिर यह कॉपीराइट ओर ट्रेडमार्क होता क्या है?

इस article में हम बात करने वाले हैं और क्या होता है? जो आईडिया आपके दिमाग में आया है वह आइडिया किसी और के दिमाग में भी आ सकता है, लेकिन आइडिया उसी का माना जाता है जो उसको रजिस्टर करा लेता है.


तो आईडिया यानी इंवेंशन को रजिस्टर कराने की इसी प्रोसेस को पेटेंट कहा जाता है

Patent


किसी आईडिया का पेटेंट ही उससे होने वाली रनिंग को उससे होने वाली इनकम को आपकी जे तक पहुंचाता है. इन्वेंटर को एक अधिकार यानी मोनोपोली दिया जाता है. खोज करने वाले पर्सन को यानी इन्वेंटर को सरकार के द्वारा दिया जाता है. इसके बाद एक फिक्स टाइम तक ना तो कोई सूरत को बना सकता है. और ना ही बैठता है अगर बनाना चाहे तो उसके लिए उसे इन्वेंटर से लाइसेंस लेना पड़ेगा. और रॉयल्टी देनी पड़ेगी जो कि 20 साल है यानी कि अगर आप कोई आईडिया क्रिएट करते हैं. तो अगले 20 साल तक उस पर आपका एक अधिकार हो जाता है.

और कोई दूसरा प्रसन्न उसको अपने नाम से नहीं चला सकता है पेट हासिल करने वाला पर्सन यानी प्रोडक्ट इन्वेंटर अपना अधिकार भेज भी सकता है. और किसी और को ट्रांसफर भी कर सकता है.

चलिए बात करते हैं किसी तरह के होते हैं के अनुसार 15 तरह के होते हैं.


Utility Patent


घी पैकिंग मशीन प्रोडक्ट का कच्चा माल किसी प्रोडक्ट कंपोजिशन. यही इस में से किसी में भी सुधार को सिक्योर करता है पूरी सैंपल पेपर ऑफ सिक्स कंप्यूटर हार्डवेयर और मेडिसिंस वगैरह यूटिलिटी पटेल के अंदर आते हैं.


Design Patent


दूसरा होता है डिजाइन पेटर्न पेटर्न प्रोडक्ट डिजाइन को गैरकानूनी इस्तेमाल करने से रोकता है. जैसे कि किसी मोबाइल का डिजाइन किसी एथलेटिक्स का डिजाइन किसी बाइक का डिजाइन कार्टून डिजाइन किए जाते हैं. ब्राइट प्रोडक्ट किया जाता है. एग्जांपल हाइब्रिड गुलाब सिल्वर फिल्टर फॉर बेटर बॉय टमाटर वगैरा.

चलिए हम बात करते हैं कि किन चीजों का पेटेंट नहीं कराया जा सकता है?

तीन चीजें ऐसी हैं जिनका पैटर्न नहीं करवाया जा सकता है.

जिसे सबसे पहली है रूल ऑफ नेचर जैसे कि हवा ग्रेविटी इन चीजों का पैटर्न नहीं करवा सकते हैं. 

दूसरी चीज है नेचुरल से पानी नहीं करवा सकते हैं. बात करते हैं कि कि नहीं मैसेज का पेटेंट कराया जाता है.

सबसे पहले जाती है कि आपका इन्वेंट ए यूनीक होना चाहिए. पूरी तरह से अलग होना चाहिए. किसी मेडिसिंस के एलिमेंट चेंज करके चेंज करके आप उसका पेमेंट करवाना चाहते हैं. उसका नहीं होगा पूरी तरह से अलग होना चाहिए.

जो पहले कभी ना बना हो दूसरी चीज आती है कि आपका इन्वेंशन यूज़फुल होना चाहिए. सनी आपका जो गजट है वह किसी काम का होना चाहिए किसी यूज़फुल परपस को पूरा करता हो और जो दावे की गए हैं. उन पर वह प्रैक्टिकली खराबी उतरता हो तो अगर आपके पास कोई ऐसा ही मेंशन है. जो यूनिक है और यूज़फुल है तो आप उसका पेमेंट करवा सकते हैं.


Copyright


क्या होता है न्यूज़ 18 से जुड़े ऐसे कामों को प्रोडक्ट करता है. जो क्लियर रूप से एक्सप्रेस किए गए हो या फिर फिजिकली स्टार्ट किए गए हो कॉपीराइट का अधिकार ऑनर के जीवन रहने तक और उसके बाद से 70 सालों तक रहता है.

किसी चीज का कॉपीराइट करवाते हैं. तो आपके पूरे जीवन में उस पर आपका कॉपीराइट रहता है. और आपके मरने के बाद भी 70 सालों तक उस पर आपका ही कॉपीराइट रहता है. लेकिन 70 साल के बाद फिर वह पब्लिक हो जाती है और उस पर किसी का कॉपीराइट नहीं रह जाता है.

टीवी शोज फिल्में या फिर ऑनलाइन वीडियो से गहरा दूसरी चीज आती है. वॉइस रिकॉर्डिंग और म्यूजिक आती है. राइटिंग असाइनमेंट जैसे कि कोई नोबेल प्राइज आती है. जैसे के पोस्टर और विज्ञापन वगैरह पाती है ओके और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कॉपीराइट होल्डर ही अपनी रचना को दोबारा से पब्लिश करके.

उस से प्रॉफिट कमा सकता है. अगर वह चाहे तो अपने अधिकार को किसी दूसरे को ट्रांसफर भी कर सकता है. और पेट भी सकता है जैसे किसी फिल्म के रीमेक का अधिकार हासिल करना.

किसी और की दुनिया गीत का इस्तेमाल उसके लिए भी परमिशन की जरूरत पड़ती है कॉपीराइट इस टाइम तक के लिए वैलिड होता है और उसके बाद से उसको पब्लिक मारने जाता है कोई भी उसका यूज़ कर सकता है. जैसे कि मैंने बताया कि कॉपीराइट ओनर जब तक जिंदा है तब तक उस पर उसका अधिकार होता है. और उसके मरने के बाद 70 सालों तक उसके बारिशों का उस पर अधिकार होता है.

लेकिन उसके बाद से उसकी उसको कोई भी उस चीज का यूज़ कर सकता है इंडिया में कॉपीराइट को कॉपीराइट एक्ट 1957 से कवर किया जाता है बात करते हैं.
कि ट्रेडमार्क क्या होता है?

Trademark


कोई भी शब्द नाम सिंबल या डिवाइस हो सकता है. इन शॉर्ट ट्रेडमार्क एक ब्रांड का नाम होता है इसकी अलग पहचान बताने वाले शब्द और नाम सिंबल आवाज यह रंगो प्रोडक्ट करता है. पेट से अलग आप 10 मार्च को हमेशा के लिए रजिस्टर करवा सकते हैं.

पेटेंट को आप सिर्फ 20 सालों तक के लिए रजिस्टर करवा सकते हैं लेकिन ट्रेडमार्क तो आप हमेशा के लिए रिश्ता करवा सकते हैं यह तब तक जारी रहेगा जब तक के बिजनेस चलता रहेगा. प्रोडक्ट किया गया है ट्रेडमार्क एक ब्रांड नेम और पहचान होता है.

जो किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस की मार्केटिंग में बड़ी भूमिका निभाता है. ट्रेडमार्क का अधिकार किसी दूसरे पर्सन द्वारा तेल सिंबल बनाकर कंफ्यूज करने से रोकने के लिए सामान किया जाता है. बनाकर बेचने से रोकने का अधिकार नहीं देता है कोई भी पर्सनल बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन अपने प्रोडक्ट व सर्विस के लिए कर सकती है.

आमतौर पर किसी नाम सेंटेंस लोगो स्पेशल माल डिजाइन यह फोटो बनाया जाता है. कंपनी के सभी प्रोडक्ट उसका रेट मार लगा हुआ होता है नारी और मांसाहारी पेड़ की पहचान के लिए हरी और लाल निशान यानी सेवा का इस्तेमाल करती है.

ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड और नॉन रजिस्टर दोनों तरह का हो सकता है चलिए हम बात करते हैं कि पेटेंट कॉपीराइट ओर ट्रेडमार्क इन तीनों में क्या फर्क होता है और यह कैसे हैं तीनों ही इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अंदर आते हैं लेकिन काफी सारे इंक अंदर डिफरेंस एसबी है जैसे कि पेटेंट का जो रजिस्ट्रेशन होता है.

वह सिर्फ 20 सालों के लिए होता है कॉपीराइट ओनरशिप जो होती है यह कॉपीराइट ओनर के बाद 70 सालों तक वैलिड रहती है. और जो ट्रेडमार्क होता है यह हमेशा के लिए रजिस्टर करवाया जा सकता है.

एक पकी में यह है कि पैटर्न जो कराया जाता है वह किसी इंवेंशन यानी आविष्कार किया जाता है. जबकि कॉपीराइट किसी क्रिएटिंग चीज का क्या जाता है.